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प्रीत जगी इतनी ख़ुद्दारी हिमालय हृदय बौद्ध सताता है हमें पूजा भक्ति शरण आशा मन दिवस दोष अशोक अनमोल घोल मोड़ सदा आस क्रोध

Hindi जोत जगी Poems